Sunday, January 4, 2009

सच है

सच है इन्सान बहुत जल्द बदल जाता है
अपने ही घर में कोई अपना नज़र नही आता है
आह निकलती है दिल से कंही खो जाती है
कोई मुसाफिर जैसे लाखो की भीड़ में खो जाता है
सच है इन्सान भुत जल्द बदल जाता है